भारत को होर्मुज की जरूरत नहीं! अर्जेंटिना के बाद एक और दोस्त भर-भर कर भेजेगा एलपीजी

नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा संघर्ष अब एक लंबे युद्ध का रूप लेता जा रहा है। शुरुआत में इस जंग के जल्द खत्म होने के जो दावे किए गए थे, वे पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। ईरान के कड़े पलटवार ने न केवल सैन्य समीकरण बदले हैं, बल्कि पूरी दुनिया को एक गंभीर ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। विशेष रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के बाधित होने से कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है। भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी समुद्री मार्ग से होता है। इस संकटपूर्ण स्थिति में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूरदर्शी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नई दिल्ली ने अपने दशकों पुराने और भरोसेमंद मित्र रूस के साथ एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए बातचीत तेज कर दी है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत और रूस ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देने के लिए आपसी सहयोग विस्तार पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा में रूस ने भारत की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस और रसोई गैस की आपूर्ति बढ़ाने की तत्परता जताई है। जानकारों का मानना है कि रूस एक प्रमुख और स्थिर आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है, जिससे भविष्य में होर्मुज मार्ग के लंबे समय तक बाधित रहने पर भी भारतीय घरों के चूल्हे जलते रहेंगे। रूस के साथ-साथ, भारत ने भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना के साथ भी एक महत्वपूर्ण साझेदारी विकसित की है। लगभग 20,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अर्जेंटीना इस संकट के समय में भारत के लिए एक बड़े विकल्प के रूप में सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन एलपीजी का निर्यात किया है, जो साल 2025 के कुल निर्यात (22,000 टन) से दोगुने से भी अधिक है। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत ने भी स्पष्ट किया है कि उनका देश भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है। भारत की यह व्यावहारिक नीति न केवल मौजूदा संकट का समाधान कर रही है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत रणनीतिक सुरक्षा कवच भी तैयार कर रही है। रूस और अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ बढ़ते ये संबंध यह सुनिश्चित करते हैं कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की विकास गति और घरेलू जरूरतें प्रभावित नहीं होंगी।