भोपाल|मध्य प्रदेश में प्रस्तावित बिजली दरों में 4.80 प्रतिशत वृद्धि को लेकर सियासत तेज हो गई है. जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है. पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार आम जनता पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता के लिए बिजली दरों में वृद्धि एक और बड़ा झटका है|
एक दशक में 22 से 24 प्रतिशम बढ़ोतरी – पटवारी
जीतू पटवारी ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रदेश में बिजली दरों में 22 से 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न्यूनतम दरों में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने ईंधन समायोजन प्रभार (एफपीपीएएस) के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं पर कुल भार और बढ़ रहा है|
पटवारी ने सवाल उठाया कि जब बिजली कंपनियां लगातार घाटे में बताई जाती हैं, तो उनकी जवाबदेही क्यों तय नहीं की जाती और हर बार इसका भार जनता पर ही क्यों डाला जाता है. कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय गरीब, किसान और मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ है. बिजली महंगी होने से छोटे उद्योग और व्यापार भी प्रभावित होंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है|
कांग्रेस सड़कों से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी
ईवी चार्जिंग पर दी जा रही छूट को भी कांग्रेस ने भ्रामक बताया. पटवारी का कहना है कि प्रदेश में अभी विद्युत वाहनों का उपयोग सीमित है, ऐसे में इस छूट का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा, जबकि बिजली दरों में वृद्धि का असर हर घर पर पड़ेगा. कांग्रेस ने मांग की है कि बिजली दरों में प्रस्तावित 4.80 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए. साथ ही एफपीपीएएस जैसे अतिरिक्त शुल्कों की पारदर्शी समीक्षा और बिजली कंपनियों के घाटे की स्वतंत्र जांच कराई जाए. पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी|

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