अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं के वर्ष 2026 के परिणाम का इंतजार इस बार 10,68,109 विद्यार्थियों को है, जिन्होंने 12 फरवरी से 28 फरवरी के बीच आयोजित परीक्षा में भाग लिया था। परीक्षार्थियों का यह इंतजार कल 24 मार्च को खत्म हो जाएगा। राज्य सरकार के निर्देशानुसार 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है, इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया तेज कर समय से पहले परिणाम जारी करने की तैयारी की है, ताकि विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
कुल 10 लाख 68 हजार 109 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे
दरअसल, राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज करते हुए समय से पहले रिजल्ट जारी करने का फैसला लिया, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। वर्ष 2026 में 10वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी से 28 फरवरी के बीच आयोजित हुई थीं, जिनमें कुल 10 लाख 68 हजार 109 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। वहीं, 12वीं की परीक्षाएं 11 मार्च तक चलीं, जिनमें 9 लाख 10 हजार 9 विद्यार्थी बैठे। पूरे प्रदेश में 6 हजार 170 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं कराई गईं। बोर्ड की कोशिश है कि 12वीं (आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स) का रिजल्ट भी इसी महीने जारी कर दिया जाए। अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो RBSE आमतौर पर 10वीं का रिजल्ट मई या जून महीने में जारी करता रहा है। वर्ष 2025 में 10वीं का परिणाम जून के पहले सप्ताह में घोषित हुआ था, जबकि 2024 में भी नतीजे मई के अंतिम सप्ताह में आए थे। 2023 में रिजल्ट जून में जारी किया गया था। इससे पहले 2022 में भी परिणाम जून के महीने में घोषित हुआ था। यानी इस बार लगभग डेढ़ से दो महीने पहले रिजल्ट जारी किया जा रहा है, जो बोर्ड की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव दर्शाता है। पिछले वर्षों के परिणाम प्रतिशत की बात करें तो 2025 में कुल पास प्रतिशत करीब 93% रहा था, जबकि 2024 में यह लगभग 93.03% था। 2023 में पास प्रतिशत 90.49% और 2022 में करीब 82.89% दर्ज किया गया था। इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है।
जानें क्या है ‘बेस्ट ऑफ टू अटेम्प्ट’ फॉर्मूला?
इसी के साथ बोर्ड ने भविष्य के लिए भी बड़ा निर्णय लिया है। साल 2027 से 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। पहला चरण फरवरी और दूसरा मई में होगा। दोनों परीक्षाएं पूरे सिलेबस पर आधारित होंगी और परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। नए सिस्टम के तहत छात्र दूसरे चरण में अधिकतम 3 विषयों में अपने अंक सुधार सकेंगे। वहीं जो विद्यार्थी पहले चरण की परीक्षा नहीं दे पाए, वे वैध मेडिकल सर्टिफिकेट या जिला शिक्षा अधिकारी (सेकंडरी) की अनुमति से दूसरे चरण में शामिल हो सकेंगे। खास बात यह है कि दोनों प्रयासों में से बेहतर अंक को ही अंतिम परिणाम में जोड़ा जाएगा। इसे ‘बेस्ट ऑफ टू अटेम्प्ट’ फॉर्मूला कहा गया है, जो छात्रों को बेहतर प्रदर्शन का दूसरा मौका देगा।

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