चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुकी है. इन नौ दिनों में माता रानी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में की गई साधना शीघ्र फलदायी मानी जाती है. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि विशेष रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है. अष्टमी तिथि को महाअष्टमी कहा जाता है और इस दिन मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्त्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के अनेक संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. नवरात्रि की अष्टमी के दिन कुछ खास उपाय करने से पूरे साल माता रानी की भी विशेष कृपा बनी रहती है और संकट का निवारण होता है.
ये काम अत्यंत शुभ
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी इस बार विशेष संयोग में पड़ रही है. अष्टमी तिथि के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और घर के पूजा स्थल में भगवती जगदंबा का चित्र अथवा यंत्र स्थापित कर विधिवत पूजा आरंभ करनी चाहिए. पूजा के दौरान मां दुर्गा के महामंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ है. इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है.
पंडित कल्कि राम के अनुसार, शाम के समय माता रानी को 16 श्रृंगार अर्पित करना चाहिए. पानी वाला नारियल चढ़ाना और लौंग के नौ फूल अर्पित करना विशेष फलदायी है. लौंग अर्पित करते समय माता रानी के किसी भी मंत्र का जाप करना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक संकट समाप्त होता है और दरिद्रता का नाश होता है.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, महाअष्टमी पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्त्व है. छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन करने से माता की विशेष कृपा मिलती है. नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक पूजा करने वाले भक्तों को शुभ फल प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

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