छिन्दवाड़ा : लगातार गिर रहे वॉटर लेवल के चलते कलेक्टर ने छिंदवाड़ा को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है. इसके साथ ही आदेशित किया है कि बिना अनुमति के कोई भी नलकूप, खनन या बोरिंग नहीं होगी और ना ही सार्वजनिक पानी को पीने के अलावा किसी और उपयोग में लिया जा सकेगा.
छिंदवाड़ा जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित
कलेक्टर हरेंन्द्र नारायण ने गर्मी में जिले में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. जारी आदेश के अनुसार, '' म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए छिंदवाड़ा जिले को तत्काल प्रभाव से 15 जून 2026 अथवा वर्षा प्रारंभ होने तक की अवधि के लिए 'जल अभावग्रस्त क्षेत्र' घोषित किया गया है.'' लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि इस साल सामान्य वर्षा होने के बाद भी जिले के पेयजल स्रोतों के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है. इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जनहित में यह आदेश जारी किया गया है.
पीने के अलावा पानी का बिना अनुमति किया उपयोग तो होगी कार्रवाई
छिंदवाड़ा जिले के सभी नदी, नालों, स्टॉपडेम, सार्वजनिक कुओं व अन्य वॉटर सोर्स का उपयोग केवल पेयजल व घरेलू प्रयोजनों के लिए सुरक्षित किया गया है. कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के इन जल स्रोतों का उपयोग किसी और उपयोग के लिए नहीं कर सकेगा. साथ ही जल अभावग्रस्त क्षेत्र में बिना अनुमति के नए नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है.निजी भूमि पर बोरिंग करने के लिए निर्धारित प्रारूप में शुल्क सहित संबंधित अनुविभागीय अधिकारी से अनुमति लेनी होगी. वहीं,शासकीय नलकूप से 150 मीटर की दूरी में नवीन नलकूप खनन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा. साथ ही निजी नलकूप की गहराई शासकीय नलकूप से कम रखी जाएगी.
आदेश का पालन नहीं करने पर होगी कड़ी कार्रवाई
आदेश का उल्लंघन करने पर म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-9 एवं भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी. कलेक्टर व जिला दण्डाधिकारी द्वारा इस आदेश का क्रियान्वयन के लिए सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के फील्ड अमले, नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारी, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व ग्राम पंचायत सचिवों को अपने-अपने क्षेत्र में आवश्यक कार्यवाही करने के संबंध में निर्देशित किया गया है.

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