नोएडा|अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ओपन हाउस में महिलाओं के लिए ऐसा मंच सजा, जहां उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। महिलाएं सिर्फ श्रोता बनकर नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने बेबाकी से अपने सवाल भी पूछे। विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहीं 200 चुनिंदा महिलाओं की मौजूदगी में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम, डीसीपी महिला सुरक्षा अनुकृति शर्मा, डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल और एडीसीपी ट्विंकल जैन ने अपने अनुभवाें से उनकी जिज्ञासाएं शांत कीं। हर सवाल के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास झलक रहा था। हर जवाब के साथ तालियों की गड़गड़ाहट माहौल में गर्मजोशी भर रही थी।
महिलाओं के हाथ में निर्णय लेने की ताकत हो तो पीछे मुड़कर नहीं देखतीं : लक्ष्मी सिंह
अपने कार्य के दौरान हमने समाज के बहुत से आयाम देखे हैं। इसमें कुछ बहुत अच्छे थे, कई बहुत बुरे थे। हमने देखा कि चाहे वर्किंग वूमेन हों या गांव में भैंस का दूध निकालती महिला, इन सबके हाथ में निर्णय लेने की क्षमता दे दी, तो फिर वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखती। आप किसी महिला को कुर्सी दे दीजिए, फिर देखिए कि वह उसके माध्यम से पूरी पीढ़ी को कुर्सी देने में सक्षम हो जाएगी।
ये बातें पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने आयोजित ओपन हाउस सेशन में कहीं। लक्ष्मी सिंह ने कहा कि महिला का स्वभाव है कि जब वह आगे बढ़ती है तो अपने साथ चार-पांच लोगों को आगे बढ़ाती है। हमारे देश में महिलाओं को हमेशा ही सम्मान दिया गया है। हमारा देश 1947 को आजाद हुआ था, उस दिन से आजतक हर महिला को एक जैसा हक दिया गया है। लक्ष्मी सिंह ने कहा कि भगवान ने महिला को ऐसी ताकत दी है कि वह एक साथ कई बातें सोच सकती है। उस पर निर्णय भी ले सकती है।
यही वजह है कि महिलाओं के फैसले बेहद संतुलित होते हैं। भारत की किसी भी नारी को कोई से भी पायदान पर खड़ा कर दीजिए, उसके हाथ में एक छोटा-सा ऑर्डर दे दीजिए और वह नारी उसे आगे बढ़ाकर दिखाएगी। यही वजह है कि आज दफ्तरों में, अस्पतालों में व अन्य क्षेत्रों में अधिकतर महिला अधिकारी ही निर्णय लेती नजर आ रही हैं। उनकी अलग पहचान भी बन रही है।
तो फेमिनिज्म की बात रही जाती है अधूरी
लक्ष्मी सिंह ने कहा, आज स्थिति यह है कि यदि किसी जगह महिला और पुरुष का झगड़ा हो रहा है, तो दूसरे लोग वहां पर मदद के लिए नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में जो लोग फेमिनिज्म और हक की बात करते हैं, वह अधूरी रह जाती है। यदि हम महिलाओं को प्रतिष्ठा और इज्जत के साथ जिंदगी देने की क्षमता रखते हैं, तो हमें जरूर देनी चाहिए।
परिवार के सहयोग से मिली सफलता
डीसीपी अनुकृति शर्मा ने बताया कि उन्होंने शादी के बाद पति के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। तब उनके मन में यह सवाल था कि पुरुष प्रधान क्षेत्र में वह कैसे काम कर पाएंगी। तब अनुकृति और उनके पति पीएचडी कर रहे थे। चार प्रयास के बाद यूपीएससी पास कर आईपीएस अधिकारी बनीं। उन्होंने बताया, शुरुआत में कुछ लोग मेरी सास से कहते थे, बहू को ज्यादा आगे बढ़ा रही हैं। पर मैं खुद किस्मत हूं कि सास ने हमेशा मेरा साथ दिया। महिलाओं को आगे आना चाहिए और सपने पूरे करने चाहिए।
मेहनत और सेवा से खास बनते हैं अधिकारी
एडीसीपी ट्विंकल जैन ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए कहा, प्रशासनिक सेवा में आने का सफर आसान नहीं होता। यूपीएससी की तैयारी के दौरान नतीजे का पता नहीं होता। लगातार मेहनत व धैर्य की जरूरत होती है। उन्होंने बताया, अधिकारी बनने के बाद भी हम आम लोगों से अलग नहीं होते। हमारा काम ही उनकी सेवा करना है। अधिकारी इसलिए खास बनते हैं क्योंकि उन्हें समाज को बेहतर सेवाएं देने की जिम्मेदारी मिलती है। महिला अगर अपने लक्ष्य पर ध्यान दे, मेहनत करे तो किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती है।
महिलाएं पुरुषों से कम नहीं, हर क्षेत्र में आगे बढ़ें
डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि यह देख गर्व होता है कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। कार्यक्रम में इतनी महिलाओं को साड़ी व सूट में एकसाथ देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा, जो काम पुरुष कर सकते हैं, वह महिलाएं भी कर सकती हैं। कई बार उनसे बेहतर भी कर सकती हैं। ऐसा माहौल बनना चाहिए, जहां सिर्फ एक दिन महिला दिवस न मनाया जाए, हर दिन महिलाओं और पुरुषों को बराबरी का सम्मान मिले। उन्होंने बताया, किसी को भी साइबर जालसाजों की बातों में आने की जरूरत नहीं है, बल्कि सतर्क रहना चाहिए।
हमेशा बड़ा सपना देखें…सपना बड़ा होगा तो आपका प्रयास भी बड़ा होगा : मेधा रूपम
हमेशा बड़ा सपना देखने चाहिए। जब सपना बड़ा होगा, तो आपका प्रयास भी बड़ा होगा। ऐसे में बड़ा सपना हर हाल में पूरा भी होगा। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने ओपन हाउस सेशन में यह बात कही। उन्होंने कहा, जिले में बच्चियों की संख्या बालकों के मुकाबले नहीं बढ़ रही। ऐसे में यह समझ में आता है कि समाज में आज भी घर का चिराग बेटे को ही समझा जाता है। इसे बदलने की जरूरत है। इस लड़ाई में आप अकेले नहीं हैं हम सब आपके साथ हैं।
जिलाधिकारी मेधा ने कहा, यह माना जाता है कि महिलाओं को कुछ करना है तो पुरुषों को पीछे जाना पड़ेगा। यह सच नहीं है। सच यह है कि महिलाओं को आगे आना होगा। पुलिस बल, थाने, तहसील, परिवहन विभाग, विकास भवन, अस्पताल, पत्रकारिता में जब महिलाएं आगे होंगी, तो ऐसी तमाम जगहें उनके लिए अपने आप सुरक्षित हो जाएंगी। उन्होंने कहा, कई बार ऐसा होता है कि हम बड़े सपने देखने से खुद को ही रोक लेते हैंै। शायद हम सपने में खो जाते हैं या लोगों की बातों में आ जाते हैं। यदि महिलाएं ठान लें, तो कोई भी ताकत उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। खुद भगवान उसका हाथ थामते हैं।
डीएम ने की पुलिस कमिश्नर की तारीफ
डीएम मेधा ने पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि नोएडा में आज कोई महिला सड़क पर चलती है और वह अपने आप को सुरक्षित महसूस करती है, तो उसका श्रेय पुलिस कमिश्नर को जाता है।
बड़ी नानी के अंतिम संस्कार पर आगे आईं थी हम बहनें
डीएम मेधा ने बताया कि बड़ी नानी के निधन के बाद अंतिम संस्कार के वक्त परिवार की सभी बुजुर्ग महिलाएं पीछे हो गई थीं। उस समय उन्होंने अपनी बहनों संग आगे आने का निर्णय किया था। ऐसे फैसलों में बड़ों का साथ रखने के लिए हमने अपनी मां का हाथ पकड़ा था।
शक्ति की समृद्धि…लखपति दीदी बन रहीं करोड़पति
अब मिशन शक्ति की धार और बढ़ेगी। प्रदेश सरकार की ओर से मिशन शक्ति के तहत बीसी सखी (बैंकिंग कॉरसपॉन्डेंट) पहल शुरू की गई है। रूरल फाइनेंस को बढ़ावा देने के लिए सरकारी उपक्रमों के माध्यम से कार्यक्रम आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि पुरुषवादी सोच ने इसका विरोध किया था लेकिन आज प्रदेश के हर गांव में बीसी सखी है, जो खाता खुलवाती है।
ओपन हाउस में आला अधिकारियों ने प्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में बात की। सीपी लक्ष्मी सिंह ने बताया, बीसी सखी ग्रामीणों को बैंक की सेविंग, निवेश और एफडी के बारे में बताती है। सभी काम पूरे करवा बैंक ले जाती है। आज महिलाएं यहां भी आगे बढ़ रही हैं, जबकि पुरुष लगातार विरोध कर रहे थे कि महिलाओं को वित्तीय प्रबंधन के बारे में क्या समझ आएगा। महिलाओं के काम को देखकर पुरुषवादी सोच ने महिलाओं को स्वीकारना सीख लिया है।
यही नहीं, पंचायती राज के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। जिस पंचायत में महिलाओं को बैठना मुश्किल होता था, वहां भी सोच बदल रही है। लक्ष्मी सिंह ने कहा, किसी महिला को आप एक लाख रुपये देकर देखिए, वह उससे करोड़ रुपये बना सकती हैं। यही वजह है कि लखपति दीदी योजना से जुड़ी महिलाएं आज करोड़पति दीदी बन चुकी हैं।
मिशन शक्ति से लें मदद
बताया गया कि महिलाओं से जुड़ी कोई भी समस्या हो, तो मिशन शक्ति केंद्र तक जा सकती हैं। समाज के हाशिये पर खड़ी महिला को मिशन शक्ति ने आशा और सोचने की काबिलियत दी है और सोच को जमीन पर उतारने का हौसला दिया है।
साइबर क्राइम से रहें सतर्क
लक्ष्मी सिंह ने बताया, साइबर क्राइम के मामलों में डिजिटल अरेस्ट जैसे मामले काफी सुनने को मिलते है। ऐसे मामलों में साइबर पुलिस लगातार काम कर रही है। पहली बार साइबर पुलिस ने साइबर क्राइम होने के दौरान पीड़ितों को उनके जाल में आने से बचाया था। ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए जिले में अलग से थाना है, जहां पीड़ित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद रहीं विशिष्ट अतिथि
राजस्थान की पूर्व मुख्य सचिव, आईएएस कुशल सिंह, जामिया मिलिया इस्लामिया व एनआईयू की पूर्व कुलपति डॉ. कुमकुम दीवान, पूर्व विधायक नोएडा विमला बाथम, इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन की उपाध्यक्ष खुशबू सिंह, जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा, भंगेल सीएचसी की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक, चाइल्ड पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमी नंदवानी, फेलिक्स अस्पताल की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. रश्मि गुप्ता, निंबस ग्रुप की डायरेक्टर यामिनी अग्रवाल, यथार्थ हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आफरीन खान, इंस्पायर इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल अनीता बंसल, खेमका फाउंडेशन की सीईओ शुभ्रा सिंह और लाइफ कोच अनीता प्रजापति।

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