पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार घरेलू निर्यातकों को राहत देने के लिए सभी नीतिगत उपाय और समर्थन तंत्र का इस्तेमाल करेगी। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यह भरोसा दिलाया।उन्होंने बताया कि निर्यात से जुड़ी समस्याओं की रोजाना समीक्षा के लिए सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है। यह समूह निर्यातकों से नियमित रूप से बातचीत कर उनकी समस्याओं और फीडबैक को समझ रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर क्या बोले गोयल?
मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही ऐसे उपायों को औपचारिक रूप देगी, जिससे निर्यातकों को राहत और भरोसा मिल सके। पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं और अमेरिका व इस्राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद उस क्षेत्र में माल भेजने में निर्यातकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस मुद्दे पर शिपिंग मंत्रालय और शिपिंग कंपनियों के साथ भी लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि निर्यातकों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। बढ़ते फ्रेट चार्ज के मुद्दे पर भी सरकार विकल्प तलाश रही है, जिससे निर्यातकों पर पड़ने वाला बोझ कम किया जा सके।
फ्रेट चार्ज क्या है?
दरअसल फ्रेट चार्ज वह शुल्क होता है, जो माल या सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए लिया जाता है। यह भुगतान परिवहन सेवा देने वाली कंपनी जैसे शिपिंग कंपनी, ट्रक ऑपरेटर, रेल या एयर कार्गो को किया जाता है।उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपने विदेशी खरीदारों के साथ किए गए सभी वादों को पूरा करता रहेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाया था, जिससे देश की पहचान एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में बनी।

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