लखनऊ|उत्तर प्रदेश में 60 हजार करोड़ की ठगी के मास्टरमाइंड राशिद नसीम के कनेक्शन कई अफसरों और सफेदपोशों से हैं। इसमें कई पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। अब जब वह भारत लाया जाएगा तब तमाम राज खुलेंगे। उसके करीबी भी जांच की जद में आ सकते हैं।दरअसल, जब शाइन सिटी के खिलाफ केस दर्ज होने शुरू हुए थे तो राशिद को भनक लग गई थी कि उस पर शिकंजा कसेगा। इसलिए वह 2019 में दुबई भाग गया था। उसके पहले उसने मामले को मैनेज करने का प्रयास भी किया था। उसके संपर्क में शासन से लेकर प्रशासन में तमाम करीबी शख्स हैं। जिन्होंने उससे बड़े पैमाने पर लाभ लिया था। उसके एवज में उसकी मदद भी की थी। चूंकि मामला इतना बड़ा हो गया था तो उसे बचाने में नाकाम रहे थे। उसके करीबियों की सूची में कुछ कथित पत्रकार भी हैं।चूंकि राशिद दुबई में पकड़ा जा चुका है। अब वह भारत लाया जाएगा। ईओडब्ल्यू और ईडी उससे पूछताछ भी करेंगी। पूछताछ में वह ऐसे राज उगल सकता है, जिससे उसको शह व मदद करने वाले अफसर, नेता व कथित पत्रकार भी बेनकाब हो सकते हैं। जांच एजेंसियों के पास उससे संबंधित तमाम सुबूत तो हैं लेकिन उसकी तस्दीक तभी हो सकेगी जब राशिद से पूछताछ होगी।एक अफसर ने की थी मदद सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी के एक अफसर ने राशिद की काफी मदद की थी। इसलिए वह आसानी से देश छोड़कर भाग गया था। इसके एवज में अफसर ने मोटा फायदा लिया था। अब देखना होगा कि राशिद के आने के बाद क्या उस अफसर पर शिकंजा कसता है या नहीं। अभी भी वह अफसर वहीं तैनात है।34 कपंनियों के जरिये बिछाया था ठगी का जाल राशिद ने शाइन सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. के अलावा 33 और कंपनियां कानपुर, दिल्ली और हरियाणा में पंजीकृत कराई थीं। इसमें उसका भाई आसिफ भी निदेशक था। फिर इन कंपनियों के प्रदेश के अलग-अलग शहरों में दफ्तर खोले थे। वहां से ग्राहकों को लुभावने ऑफर का लालच देकर प्लॉट व निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये पार कर लिए और एकाएक दफ्तर बंद कर भाग गए थे।

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