कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार देर रात निधन हो गया. पिछले कुछ दिनों से कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली. मुकुल रॉय 72 साल के थे. परिवार ने उनके निधन की घोषणा की. मुकुल रॉय के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है.
मुकुल रॉय बंगाली राजनीति के चाणक्य कहे जाते थे. उन्होंने राजनीतिक करियर की शुरुआत लेफ्ट कैंप से की थी, लेकिन वाम खेमे में बहुत कम समय तक रहे. उत्तर 24 परगना के कांग्रेस नेता मृणाल सिंघराई उन्हें पार्टी में ले आए. मुकुल ने कांग्रेस में अपना सफर छात्र परिषद में शामिल होकर शुरू किया. तब से, वह ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं.
टीएमसी के संस्थापक सदस्य रहे
ममता बनर्जी ने नब्बे के दशक के आखिर में एक नई पार्टी बनाने का फैसला किया. उस समय की विपक्षी नेता ममता ने मुकुल और कुछ अन्य लोगों के साथ एक नई पार्टी बनाने का प्लान बनाया. मुकुल, अतिन घोष और तमोनाश घोष जैसे 9 नेताओं ने नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस बनाने के लिए चुनाव आयोग में आवेदन किया. ममता उस समय ऑफिशियली तृणमूल की सदस्य नहीं बनी थीं. बाद में, वह सदस्य बन गईं.
UPA-2 सरकार में शिपिंग राज्य मंत्री बने
तब से लेकर 2017 तक मुकुल तृणमूल कांग्रेस की पहचान बन गए. 2009 में वह UPA-2 सरकार में शिपिंग राज्य मंत्री बने. फिर 2011 में तृणमूल कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ममता मुख्यमंत्री बनीं. दिनेश त्रिवेदी ने उनसे रेल मंत्रालय संभाला. बाद में, रेल किराए में बढ़ोतरी से नाराजगी के कारण दिनेश को मंत्रालय छोड़ना पड़ा. इसके बाद मुकुल रेल मंत्री बने.
2017 में टीएमसी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए
2017 में दुर्गा पूजा की पंचमी पर, नेता ने निजाम पैलेस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तृणमूल कांग्रेस से अलग होने का ऐलान किया था. पूजा खत्म होने के बाद, पूर्व रेल मंत्री ने अपनी राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था. कई महीनों से मुकुल के BJP में शामिल होने की अटकलें लग रही थीं. आखिरकार, 3 नवंबर 2017 को, वह दिल्ली में BJP के सेंट्रल ऑफिस गए और BJP के सदस्य बन गए.
मुकुल रॉय जून 2021 तक BJP में रहे. मुकुल कृष्णानगर नॉर्थ सीट से तृणमूल की कैंडिडेट कौशानी मुखर्जी को हराकर पहली बार विधायक बने थे. हालांकि, उस चुनाव में BJP की हार के बाद उन्होंने पाला बदल लिया और फिर टीएमसी में शामिल हो गए. लेकिन, तब से मुकुल राजनीतिक में अधिक एक्टिव नहीं दिखे.

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