February 21, 2026

छतों पर बिना लाइसेंस होर्डिंग पर रोक, नई प्रचार नियमावली लागू

लखनऊ| में कमाई के लिए लोग अब अपने घरों की छतों पर मनमाने तरीके से होर्डिंग नहीं लगवा सकेंगे। जिनके पास नगर निगम से जारी प्रचार लाइसेंस होगा, वही होर्डिंग लगवा सकेगा। उन होर्डिंगों को भी नगर निगम बिना किसी नोटिस के हटवा सकेगा, जो आपत्तिजनक, भड़काऊ या जानलेवा होंगे। नई प्रचार नियमावली उत्तर प्रदेश नगर निगम (आकाश चिह्न और विज्ञापनों का विनियमन) नियमावली 2026 में इसके प्रावधान किए गए हैं। दो फरवरी को इसका प्रकाशन हो गया है और अप्रैल से लागू हो जाएगा।शहर में बड़ी संख्या में भारी भरकम होर्डिंगें छतों पर खतरनाक तरीके से लगे हैं। जिन लोगों ने इसे लगाया है, उनमें अधिकतर ने नगर निगम से अनुमति नहीं ली है। कुछ ने तो सीधे ही कंपनियों को ठेके पर दे दिया है। होर्डिंग जिन इमारतों पर लगे हैं, वह कितनी मजबूत हैं, यह भी पता नहीं। नगर निगम भी उन्हें नहीं हटा पाता। इसके लिए एलडीए और आवास विकास की राह ताकता है। नई नियमावली में विभागों की अनापत्ति समाप्त कर दी गई है। अब अवैध होर्डिंगों को हटाने के लिए नगर निगम नोटिस देकर कार्रवाई कर सकता है।
 
विज्ञापन शुल्क जमा न करने वालों की कटेगी आरसी

नई नियमावली से उन विज्ञापन एजेंसियों की मुसीबत बढ़ेगी, जो नगर निगम का करोड़ों रुपये विज्ञापन शुल्क दबाए बैठी हैं। एक सप्ताह पहले नगर निगम ने विज्ञापन शुल्क जमा न करने वाली करीब 150 विज्ञापन एजेंसियों को नोटिस जारी किया था। अभी नगर निगम सिर्फ प्रचार सामग्री ही हटा पाता है, लेकिन अब एजेंसियों से भू राजस्व की तरह वसूली कर सकेगा, यानि आरसी काट सकेगा।

दो नहीं, नौ वर्ष के लिए उठेगा ठेका

यूनीपोल, कियोस्क, बस शेल्टर सहित सभी तरह के प्रचार का ठेका अभी नगर निगम दो वर्ष के लिए उठाता है, लेकिन नई नियमावली लागू होने के बाद यह नौ साल के लिए उठाया जाएगा, जिसे तीन साल तक बढ़ाया भी जा सकेगा। ऐसे में एजेंसियां प्रचार शुल्क न जमा करने और अवैध होर्डिंग लगाने में मनमानी नहीं कर पाएंगी। किस रोड पर विज्ञापन शुल्क क्या होगा और कौन सा इलाका किस श्रेणी में आएगा, इसे नगर निगम तय करेगा।

नए वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा

अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने बताया किनई प्रचार नियमावली आई है। इसके प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है। नियमावली के तहत कुछ नियम, निर्देश भी शहर के हिसाब से तय किए जाने हैं। उसके बाद इसे नए वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा।