February 17, 2026

तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख ने तृषा को लेकर की विवादित टिप्पणी, विवाद बढ़ने पर मांगी माफी

चेन्नई। चेन्नई में राजनीति और फिल्म जगत से जुड़ा एक बयान बड़ा विवाद बन गया, जब भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई (Tamilnadu unit) के अध्यक्ष नयनार नागेंद्रन (Nayanar Nagendran) ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर टिप्पणी कर दी। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद नागेंद्रन को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी।

 

विजय पर टिप्पणी करते हुए घसीटा तृषा का नाम

विवाद तब शुरू हुआ जब नागेंद्रन ने अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख विजय की राजनीतिक सक्रियता पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि विजय को राजनीति में सफल होने के लिए “पहले तृषा के घर से बाहर आना चाहिए।” यह टिप्पणी तेजी से वायरल हो गई और इसे व्यक्तिगत व असम्मानजनक बताया गया।

 

माफी में कहा—“शब्द अनजाने में निकल गए”

नागेंद्रन, जो तिरुनेलवेली विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं, ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान गलती से दिया गया और यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पार्टी नेताओं वनति श्रीनिवासन और के. अन्नामलाई से चर्चा की।

 

तृषा की कड़ी प्रतिक्रिया, राजनीति से दूरी बताई

तृषा ने अपने वकील के माध्यम से जारी बयान में टिप्पणी को “अशोभनीय और अनावश्यक” बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वे हमेशा राजनीति से दूर रही हैं।अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें केवल अपने सिनेमा कार्यों से पहचाना जाना चाहिए, न कि राजनीतिक विवादों में घसीटा जाए। तृषा और विजय ने पहले कई फिल्मों में साथ काम किया है, जिनमें घिल्ली जैसी हिट फिल्म शामिल है, लेकिन दोनों के बीच किसी राजनीतिक जुड़ाव की बात से इनकार किया गया है।

 

विपक्ष ने भी जताई आपत्ति

विवाद पर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की नेता कनिमोई सहित कई नेताओं ने बयान को महिलाओं के प्रति असम्मानजनक बताते हुए इसकी निंदा की। कांग्रेस नेताओं ने भी राजनीतिक बहस में फिल्म अभिनेत्री का नाम लाने पर सवाल उठाए।

 

माफी के बाद भी जारी बहस

हालांकि नागेंद्रन की माफी के बाद विवाद कुछ शांत हुआ है, लेकिन इस घटना ने तमिलनाडु की राजनीति में निजी टिप्पणियों, सेलिब्रिटी प्रभाव और राजनीतिक संवाद की मर्यादा पर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में यूजर्स ने इस तरह की बयानबाजी को अनुचित बताया।