धनबाद। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मैथन पावर लिमिटेड (MPL) की रेलवे परियोजना से जुड़े भू-अर्जन घोटाले की जांच और तेज कर दी है। मामले में आरोप है कि परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन में फर्जी लाभुक बनाकर करोड़ों रुपये के मुआवजे की हेराफेरी की गई।
सूत्रों के अनुसार, कई लोगों ने 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हड़प ली। जांच के दौरान 192 संदिग्ध नाम सामने आए हैं, जिनमें से लगभग 150 लोगों ने फर्जी डीड का सहारा लेकर वास्तविक रैयतों का मुआवजा ले लिया। एसीबी ने संदिग्धों को नोटिस भेजने पर कई ऐसे नाम पाए जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008 में रेलवे लाइन परियोजना के लिए मुग्मा और पांड्रा मौजा में लगभग 22 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। भू-अर्जन प्रक्रिया के दौरान अनियमितताओं की शिकायतें मिलने पर वर्ष 2016 में एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर प्रारंभिक जांच शुरू की थी। तब से इस घोटाले की गहन जांच चल रही है।
अब एसीबी दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल कर रही है। राजस्व रिकॉर्ड, डीड और बैंक भुगतान की जानकारी का मिलान किया जा रहा है ताकि फर्जी लाभुकों की पहचान की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जिन वास्तविक रैयतों को नुकसान हुआ है, उनके मामले की समीक्षा भी की जाएगी।
इस जांच से यह स्पष्ट हो रहा है कि रेलवे परियोजनाओं में भू-अर्जन के दौरान फर्जी लाभुकों और मुआवजा हेराफेरी पर नजर रखना बेहद जरूरी है, ताकि सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग रोका जा सके।

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