February 13, 2026

पर्यटन चमक रहा, लेकिन घरों में सूखे नल, कब तक सब्जबाग देखते रहेंगे शिवपुरी के नागरिक?

कब तक  सब्जबाग देखते रहेंगे शिवपुरी के नागरिक?,आधुनिक पर्यटन नगरी में रहने वाली 2.75 लाख की आबादी पानी के लिए परेशान

नपा के जिम्मेदारों का प्राइवेट टैंकरों से हुआ अघोषित अनुबंध, नपा के टैंकर नेताओं व अधिकारियों के बंगलों पर हो रहे खाली

जनता को मिल रहा 600 का टैंकर, वो भी बुकिंग के 10 से 12 घंटे बाद,नपा के जिम्मेदार कर रहे पेशी में जाने की तैयारी

शिवपुरी। आधुनिक पर्यटन नगरी शिवपुरी में रहने वाली 2.75 लाख की आबादी बीते एक सप्ताह से सिंध जलावर्धन की सप्लाई से वंचित है, जबकि 90 फीसदी शहर की जल जीवन धारा मड़ीखेड़ा है। पहले लोहे की पाइप लाइन फूटी, और अब मोटर खराब होने की बात कर रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात हो चुकी नगरपालिका के जिम्मेदारों ने प्राइवेट टैंकर वालों से अघोषित अनुबंध कर लिया। गर्मी की दस्तक होने के साथ ही पानी की खपत बढ़ गई, उधर सिंध की सप्लाई ठप होने से प्राइवेट टैंकरों के रेट 600 रुपए हो गए। चूंकि नपा के टैंकर तो नेताओं और अधिकारियों के बंगलों में खाली हो रहे हैं, इसलिए जनता को तो महंगे रेट में टैंकर खरीदना मजबूरी है। सीएमओ इसी शहर में पले बढ़े हैं, उन्होंने भी कट्टियां ढोई हैं, ऐसा बताया था, लेकिन अब तो फ्री के टैंकर खाली हो रहे हैं। मध्यप्रदेश का शिवपुरी वो जिला है, जिसमें विधानसभा और लोकसभा दोनों सीटों पर सिंधिया परिवार का कब्जा रहा।लोकसभा में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी कायम है। हालांकि वर्ष 2019 में इस सीट पर शिकस्त मिली थी, लेकिन वर्तमान में वो फिर काबिज हैं। विधायक हो या नगरपालिका अध्यक्ष, इनके परिवार का सदस्य, या फिर उनका समर्थक ही विराजमान होता रहा है। पिछले विधानसभा में जो विधायक जीते, वो सिंधिया गुट के न होकर तोमर गुट के हैं।

खैर हमें राजनीति से क्या लेना देना..?

हमारा सवाल तो यह है कि जिस शिवपुरी शहर पर सिंधिया परिवार की छत्रछाया है, उस शहर की जनता विकास की बात तो दूर सड़क-बिज्ली-पानी, जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस शहर व जिला मुख्यालय पर सिंधिया परिवार बरसों से राजनीति कर रहा हो, तथा वहां की जनता पानी के लिए तरस रही हो, तो फिर इसे क्या मानें..?, क्या वो खुद नहीं चाहते कि इस शहर की जनता को सभी मूलभूत सुविधाएं मिलें, तथा शहरवासी खुश रहें…? यदि ऐसा है, तो फिर अपनी मंशा स्पष्ट शब्दों में बयान करना चाहिए, तथा आधुनिक पर्यटन नगरी जैसे सब्जबाग नहीं दिखाना चाहिए। आपको याद होगा बीते 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर नगरपालिका ने विजन शिवपुरी की झांकी लगाई थी, जो यह स्पष्ट कर रही थी कि वरिष्ठ नेताओं की तरह वो भी सिर्फ झांकी में आधुनिक पर्यटन नगरी बनाकर दिखाएंगे, धरातल पर तो पानी भी नहीं देंगे।

आखिर समस्या क्यों बनी रहती है?

बढ़ती आबादी के अनुरूप जलस्रोतों का विस्तार नहीं।

पुरानी वितरण प्रणाली और लीकेज।

वर्षा जल संचयन की अनदेखी।

तालाबों और परंपरागत जल संरचनाओं का उपेक्षित रख-रखाव।

योजनाओं की घोषणा अधिक, क्रियान्वयन कम।

अब ज़रूरत है ठोस कदमों की।

स्थायी जल स्रोतों का विकास और संरक्षण।

हर भवन में वर्षा जल संचयन अनिवार्य करना।

जल वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण।

लीकेज पर त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही तय करना।

जनभागीदारी के साथ पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम।

पर्यटन नगरी की असली पहचान सुंदर इमारतों से नहीं, बल्कि संतुष्ट नागरिकों से होती है। यदि शहर का आम नागरिक ही पानी के लिए परेशान है, तो विकास का सपना अधूरा है। अब सवाल यही है—क्या जिम्मेदार तंत्र ठोस समाधान देगा, या नागरिक यूँ ही सब्जबाग देखते रहेंगे?