जयपुर। राजस्थान का बजट पेश होने के बाद से ही सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष और बजट विश्लेषकों का कहना है कि पहली नजर में यह बजट आकर्षक और उम्मीदों से भरा हुआ दिखता है, लेकिन गहराई से देखने पर कई सवाल खड़े होते हैं। हर साल की तरह इस बार भी घोषणाओं की लंबी सूची तो है, पर उनके धरातल पर उतरने का रास्ता नहीं दिखाई दे रहा।
कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का नाम तक नहीं लिया गया, जबकि कुछ क्षेत्रों का उल्लेख तो हुआ, पर ठोस रणनीति और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव साफ झलकता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह बजट सचमुच विकास की दिशा तय करेगा या फिर कागजों में सिमट कर रह जाएगा।
महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के बारे में चर्चा तक नहीं
जयपुर से मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन किसी का फोकस जयपुर पर नहीं है। बजट में मात्र कागजी प्रावधान किए गए है। जयपुर मेट्रो का नाम तक नहीं है। नरेगा लोन और रोजगार को लेकर कुछ नहीं है। यह कहना है आदर्श नगर विधायक, रफीक खान का।
राज्य सरकार की ओर से पेश किए बजट से प्रदेशवासियों में मायूसी व्याप्त है। एक लाख नई भर्तियां प्रतिवर्ष करने की घोषणा के अनुरूप नई भर्तियों की कोई घोषणा नहीं हुई। नवीन महाविद्यालय, चिकित्सालय नहीं खोले। यह कहना है पूर्व शिक्षा मंत्री, गोविंद डोटासरा का।
अर्थशास्त्री, प्रो. एन. डी. माथुर के अनुसार शिक्षा में की गई अधिकांश घोषणाएं तकनीक और उपकरणों तक नजर आती हैं। शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता सुधार और बच्चों की शिक्षा में सुधार करने की कोई ठोस योजना स्पष्ट नहीं दिखती। प्रदेश में लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए भ्रष्टाचार नियत्रंण और जवाबदेही के लिए ठोस मापदंड़ों का अभाव भी खटकता है।
खेल के लिए की गई बजट घोषणा तो सराहनीय है लेकिन पूरे बजट में स्थाई कोचों की नियुक्ति की घोषणा न होना निराशाजनक है। बिना स्थाई कोचों की भर्ती के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना काफी कठिन है। यह कहना है राज. राज्य क्रीड़ा परिषद के सीएसओ, वीरेंद्र पूनिया का।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि सरकार का विजन आंकड़ों तक सीमित दिखा। स्थाई रोजगार, किसानों की कर्जमाफी, पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने जैसे मुद्दों पर ठोस घोषणा नहीं की गई।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि व्यापक जनहित में कोई घोषणा नहीं की गई। प्रदेश के 90 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों में निराशा है क्योंकि पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। साथ ही रिफाइनरी और ईआरसीपी का जिक्र नहीं होना निराशाजनक है।
विफलता के आंकड़े
नेता विपक्ष टिकाराम जूली ने दावा किया कि पिछले दो बजटों की 2718 घोषणाओं में से केवल 900 ही पूरी की गई है, जबकि 284 परियोजनाओं पर तो काम भी शुरू नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार 2026 की जमीनी हकीकत से दूर है और जवाबदेही से बचने के लिए 2047 के सपने दिखा रही है।

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