जयपुर| के प्रसिद्ध श्रीखेड़ापति हनुमानजी मंदिर को लेकर 26 साल पुराने मामले में फागी कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मंदिर को गलता तीर्थ की संपत्ति मानते हुए इसके प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी देवस्थान विभाग को सौंपने का आदेश दिया।
मंदिर पर रहेगा प्रशासन का नियंत्रण
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) फागी की अदालत ने 4 फरवरी को किशनलाल एवं अन्य बनाम मंदिर ठिकाना गलता, सार्वजनिक न्यास और देवस्थान विभाग प्रकरण में यह फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद अब मंदिर से जुड़ा संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण सरकारी व्यवस्था के अधीन आ गया है।
जानें क्या है मामला?
यह विवाद नवंबर 1999 में शुरू हुआ था, जब मंदिर के स्वामित्व, प्रबंधन और पुजारी पद को लेकर मामला फागी कोर्ट में पहुंचा। वर्षों तक चली सुनवाई और साक्ष्य की पड़ताल के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि श्रीखेड़ापति हनुमानजी मंदिर गलता तीर्थ से संबंधित है और इसका संचालन व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि सार्वजनिक न्यास के नियमों के अनुसार होना चाहिए। अदालत ने वर्तमान पुजारी बालकिशन को पद से हटाने के निर्देश भी दिए हैं। अब मंदिर का संचालन, पूजा व्यवस्था और संपत्ति से होने वाली आय-व्यय का पूरा हिसाब-किताब देवस्थान विभाग करेगा।
हाईकोर्ट के फैसले तक लागू रहेगी वर्तमान व्यवस्था
अदालत ने आदेश दिया कि मंदिर और उससे जुड़ी सभी चल-अचल संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शिता के साथ किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे और मंदिर की आय का उपयोग धार्मिक एवं जनहित कार्यों में हो। हालांकि, इस मामले में हाईकोर्ट में अपील लंबित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक वर्तमान व्यवस्था यथावत लागू रहेगी। यह फैसला गलता तीर्थ और देवस्थान विभाग के लिए कानूनी जीत माना जा रहा है।

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