नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नीति निर्धारण में समन्वय की कमी का आरोप लगाकर सवाल उठाया है कि क्या बजट के आंकड़े पेश होने के तुरंत बाद संशोधित किए जाएंगे। यह चिंता इसलिए है क्योंकि बजट के कुछ ही दिन बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई शृंखला जारी होगी।
कांग्रेस के संचार प्रभारी और रात्यसभा सांसद महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट 1 फरवरी 2026 को पेश होगा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि राज्य सरकारें इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि बजट में उनके लिए क्या प्रावधान होने वाले हैं, क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा करने वाली हैं। वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच वर्षों में बनता है और यह केंद्र द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, उसके वितरण और विशेष अनुदान तय करता है। 16वां वित्त आयोग 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि से संबंधित है।
कांग्रेस नेता रमेश ने दो प्रमुख चिंताओं का जिक्र किया। पहली यह कि कई बजट आंकड़े जीडीपी के प्रतिशत के रूप में पेश किए जाएंगे, जबकि 27 फरवरी 2026 को जीडीपी की नई शृंखला जारी होने वाली है। दूसरी चिंता सीपीआई की है, जिसकी नई शृंखला 12 फरवरी 2026 को जारी होगी। इसमें खाद्य कीमतों की हिस्सेदारी में गिरावट आ सकती है, जिससे बजट के आंकड़ों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में भी संशोधन किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि यह सभी परिस्थितियां नीति निर्माण में तालमेल की कमी को दिखाती हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करेंगी, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं। कांग्रेस का तर्क है कि बजट आंकड़े और नई आर्थिक शृंखलाओं के बीच अंतर से राज्यों और नीति निर्माताओं के लिए असमंजस पैदा हो सकता है।

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