भोपाल। मध्य प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए फाइव-डे वर्किंग सिस्टम लागू है. हफ्ते में पांच दिन कार्य करना होता है और दो दिनों का वीक ऑफ या छुट्टी रहती है. प्रदेश के मुखिया सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ-साफ कहा है कि यदि फाइव-डे वर्किंग चाहिए तो समय पर ऑफिस आना होगा।
‘कार्यालय में काम का समय बढ़ाना होगा’
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बुधवार (7 जनवरी) को एक अहम बैठक की. मीटिंग में मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाना समेत कई सीनियर अफसर मौजूद थे. इस बैठक में फाइव-डे वर्किंग के बारे में उन्होंने कहा कि कोविड काल से प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में 5 दिवसीय सप्ताह की व्यवस्था लागू है. इस अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए कार्यालयीन समय को बढ़ाना और सभी के द्वारा उसका अनुसरण जरूरी है।
‘ऑफिस में काम 10 बजे शुरू हो’
सीएम ने नसीहत देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में सुबह 10 बजे से कार्य आरंभ हो. सरकारी ऑफिस में तकनीक को बढ़ावा देने के बारे में कहा कि इसके लिए बायोमेट्रिक समेत अन्य तकनीकी प्रणालियों का सहारा लिया जाए. इससे अनुशासन के साथ कार्य निष्पादन में भी सुधार होगा।
कोविड-19 के समय शुरू हुआ फाइव-डे वर्किंग
एमपी के करीब 7 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को कोविड-19 के समय राहत देते हुए तत्कालीन सरकार ने सरकारी ऑफिस में फाइव-डे वर्किंग लागू की थी. कर्मचारियों और अधिकारियों को हफ्ते में पांच दिन काम करना होता है और दो दिनों का अवकाश मिलता है. इसे राज्य सरकार ने अब तक जारी रखा है. इस व्यवस्था की वजह से सरकारी काम में किसी प्रकार की बाधा ना आए, इसलिए सीएम मोहन यादव ने अब सख्त निर्देश दिए हैं. शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को समय पर आने के लिए कहा है।

More Stories
कोहरे की कैद में मध्य प्रदेश, ऊपर से बर्फीली हवाओं का हमला, शाजापुर में 5 डिग्री से नीचे तापमान
मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों को सरकार कराएगी फ्री कोचिंग, 2 छात्रावास बनवाने की तैयारी
16 फरवरी से शुरू होगा एमपी विधानसभा का बजट सत्र, 19 दिनों में होंगी 12 बैठकें