बेंगलुरु। बारिश के चलते बेंगलुरु में सड़कों की हालत बेहद खराब है और चौतरफा गड्ढे ही गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। इस पर राज्य के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का कहना है कि ये ईश्वरी प्रकोप है। इससे कर्नाटक में सियासी बवाल मच गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शेहजाद पूनावाला ने सरकार की इस दलील पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रकिंग प्लेटफॉर्म ब्लैकबक के बेल्लांदूर रिंग रोड पर अपने ऑफिस ट्रांसफर की धमकी के बाद, अब कई टेक कंपनियां भी बेंगलुरु छोड़ने पर विचार कर रही हैं। समस्या को सुलझाने की सबसे कम मंशा है। कर्नाटक के लोग सबसे ज्यादा टैक्स चुकाते हैं, लेकिन उन्हें गारंटी की बजाय केवल गड्ढे, बिगड़ती बुनियादी ढांचा और नागरिक समस्याएं मिल रही हैं, खासकर बेंगलुरु में।
राज्य की सड़कों की बुरा हाल, जलभराव और गड्ढों को लेकर डिप्टी सीएम डीके शिवाकुमार की खूब आलोचना हो रही है। इसी बीच गड्ढों की समस्या को लेकर डिप्टी सीएम और बेंगलुरु विकास मंत्री डीके शिवकुमार के बयान पर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए सड़कों पर गड्ढों की समस्या के लिए प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने बताया कि शहर में करीब 7,000 गड्ढों की मरम्मत हो चुकी है और 5,000 की मरम्मत की जा रही है।
शिवकुमार ने कहा, ‘सड़कों पर गड्ढे जानबूझकर नहीं बनाए जाते हैं। ये प्राकृतिक कारणों खासकर भारी बारिश का परिणाम हैं। हमने समस्या से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। करीब 7,000 गड्ढे पहले ही भर दिए गए हैं। बाकी 5,000 पर काम तेजी से चल रहा है। मैंने पुलिस कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी है ताकि प्रयासों को समन्वयित कर और तेजी से पूरा किया जा सके।‘ उन्होंने भाजपा विधायकों से अपील की कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में गड्ढे को दूर करने पर ध्यान दें ना कि राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए।
कर्नाटक के डिप्टी सीएम और विकास मंत्री डीके शिवाकुमार ने सभी विधायकों से अपील करते हुए कहा कि हमने प्रत्येक एएलए के लिए विकास कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। वे इन फंड्स का इस्तेमाल गड्ढों को ठीक करने के लिए करें, बजाय इसके कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के। हम इस पर राजनीति नहीं करना चाहते। समाधान जरूरी है शिवकुमार ने कहा कि माना कि शहर की सड़कों की बिगड़ती स्थिति वाहनों की बढ़ती संख्या, भारी ट्रैफिक और लगातार बारिश के कारण और खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि सामान्य नागरिक भी गड्ढों की शिकायत कर रहे हैं। अगर लोग सड़कें ब्लॉक करना या प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो वे स्वतंत्र हैं। हम समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रोफेसर आशीष वर्मा ने शुक्रवार फॉर फ्यूचर द्वारा आयोजित एक पैनल डिस्कशन में कुल यात्राओं में से मुश्किल से 8-10 प्रतिशत ही कारों से हो रही हैं। इसलिए अगर एक बड़ा हिस्सा सुरंग वाली सड़क पर भी चला जाए, तब भी आपको बेतरतीब ट्रैफ़िक मिलेगा और सुरंग का बहुत कम उपयोग होगा।

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