व्यापार: जीएसटी दरों में कटौती के कारण उत्पादों के दाम घटने और त्योहारी सीजन के कारण मांग एवं बैंकों के कर्ज वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रोथ्सचाइल्ड एंड कंपनी इंडिया प्राइवेट लि. की बोर्ड अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सलाहकार नैना लाल किदवई ने कहा, देश में पिछले वर्ष की तुलना में बैंक कर्ज में वृद्धि सुस्त रही है। इसकी प्रमुख वजह कमजोर पूंजीगत खर्च और सुस्त मांग है।
किदवई ने कहा, पूंजीगत खर्च और मांग में कमजोरी इस बात का संकेत है कि प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में कारोबारियों ने सतर्क रुख अपनाया है और उपभोक्ता गतिविधियों में कमी आई है। हालांकि, आगामी त्योहारी मांग और जीएसटी में नवीनतम सुधारों से उपभोक्ता धारणा में सुधार होगा। उन्होंने कहा, जब बाजार में उपभोक्ता मांग और खपत बढ़ेगी तो खाली पड़ी क्षमताओं का उपयोग होगा। इससे कंपनियां अधिक पूंजीगत खर्च करने लगेंगी।
घरेलू मांग से होगी टैरिफ के नुकसान की भरपाई
फिक्की लीड्स कार्यक्रम में किदवई ने कहा, अमेरिकी टैरिफ का जरूर असर पड़ेगा। कपड़ा, चमड़ा और हीरे जैसे निर्यात उन्मुख क्षेत्रों पर ज्यादा बुरा असर पड़ेगा। जब हम नए बाजारों की तलाश कर रहे हैं, तो इन क्षेत्रों का समर्थन करना होगा क्योंकि ये बड़ी संख्या में रोजगार देते हैं। उन्होंने कहा, अच्छी बात यह है कि भारत घरेलू अर्थव्यवस्था है और अगर हम मांग को बढ़ा सकें, तो टैरिफ से नुकसान की भरपाई संभव है।
कर्ज वृद्धि 4.2 फीसदी घटी
आरबीआई के मुताबिक, 2024-25 में बैंकों की कर्ज वृद्धि की रफ्तार घटकर 12.1 फीसदी रह गई। 2023-24 में बैंक कर्ज में 16.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। त्योहारी सीजन में बैंक कर्ज बढ़ सकता है।

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