साल भर में 24 एकादशी मनाई जाती हैं, जिनमें से परिवर्तनी एकादशी का अलग ही महत्व है. इस एकादशी में सारे नियमों का पालन करने से मनुष्य की गलतियों का प्रायश्चित होता है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है. इसे पद्मा एकादशी भी कहते हैं. इस दिन भगवान की स्तुति से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार यह परिवर्तिनी एकादशी खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन कई शुभ सयोंग बन रहे हैं. इसमें आयुष्मान, सौभाग्य और रवि योग है. जानें लाभ…
कब है परिवर्तिनी एकादशी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 3 सितंबर को सुबह 04 बजे के लगभग एकादशी तिथि प्रारंभ हो रही है. इसका समापन 4 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट के लगभग होगा. ऐसे में 3 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा. इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 35 मिनट से लेकर 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने के लाभ
– ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस व्रत को करने से भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और घर धन-धान्य से संपन्न बनता है.
– पुराणों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से मुनष्य भवसागर तर जाता है और उसे प्रेत योनि के कष्ट नहीं उठाने पड़ते हैं. हमेशा लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है.
परिवर्तिनी एकादशी पर न करें ये काम
परिवर्तिनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए. इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने की भी मनाही है. साथ ही इस दिन पर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति पाप का भागीदार होता है.

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