गाजियाबाद। जिले में उमस भरी गर्मी के चलते सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार, उल्टी-दस्त और डायरिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में बिजली की बत्ती के गुल हो जाने से बीमारों और तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली गुल, मरीज बेहाल
शनिवार को जिला एमएमजी अस्पताल में बिजली आपूर्ति ठप हो जाने से ओपीडी से लेकर आइसीयू तक मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन के कक्ष संख्या-34 में सबसे ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। बिजली गुल होने के चलते डॉ. रंजन को मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों को देखना पड़ा। यह भी किसी त्रासदी से कम नहीं है।
आईसीयू में बिगड़े हालात
बिजली न होने से आईसीयू में भर्ती मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। मशीनें बंद हो गईं और मरीज बेहाल नजर आए। कार्यवाहक सीएमएस डॉ. संतराम वर्मा ने दावा किया कि तकनीकी खराबी को एक घंटे में दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल करा दी गई थी। हालांकि, मरीजों और तीमारदारों ने अव्यवस्था को लेकर जमकर नाराजगी जताई। सीएमएस के अनुसार, अस्पताल की इमरजेंसी में दो अज्ञात समेत चार लोगों को मृत घोषित किया गया। इनमें से दो लोगों को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था।
ओपीडी में मरीजों की भीड़
शनिवार को जिला एमएमजी और जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में कुल 2,568 मरीज पहुंचे। इनमें 1,122 महिलाएं, 998 पुरुष और 325 बच्चे शामिल रहे। बुखार के 379 मरीज दर्ज किए गए, जिनमें 46 बच्चे थे। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में 395 महिलाएं पहुंचीं और इमरजेंसी में 39 मरीजों को भर्ती किया गया। वहीं, अस्पताल में शनिवार को कुल 21 प्रसव कराए गए।
गर्मी और मौसम बदलने से बढ़ी बीमारियां
डॉ. आलोक रंजन ने बताया…
''मौसम में लगातार बदलाव और उमस भरी गर्मी के कारण बुखार, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।''
डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि प्रताप विहार की रहने वाली महिला सबा परवीन ओपीडी में अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी लेकिन उसे तत्काल इमरजेंसी में भर्ती कराने के बजाय ईएमओ ने उसे इधर-उधर दौड़ाते रखा। जब परिजनों ने हंगामा किया, तब कहीं जाकर उसे भर्ती किया गया।
इसी तरह बजरिया निवासी शकुंतला को भी तीन घंटे तक भर्ती नहीं किया गया और उसे भी परिजनों के हंगामे के बाद भर्ती किया गया।
गंभीर मरीजों को भर्ती में लापरवाही
यही नहीं पांच अन्य गंभीर मरीजों को भी भर्ती कराने में डॉक्टरों ने जमकर चक्कर कटवाए, जिससे मरीजों के परिजन परेशान होते रहे।
कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने के मामले बढ़े
इसके अलावा कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। शनिवार को दोनों अस्पतालों में कुल 253 लोगों ने एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई, जिनमें से 109 लोगों को पहली डोज दी गई। टीका लगवाने वालों में 29 बच्चे भी शामिल रहे।
मरीजों ने लगाई निर्बाध सुविधाओं की गुहार
अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की भीड़ और सुविधाओं की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। मरीजों और तीमारदारों ने मांग की है कि बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जाए ताकि आपात स्थिति में किसी मरीज की जान को खतरा न हो।
वहीं, चिकित्सा विभाग को भी संवेदनशीलता दिखाते हुए गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

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