रायपुर: बस्तर में वर्ष-1986 से अधर में अटकी बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना फिर से शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की चर्चा के बाद इसकी संभावना काफी बढ़ गई है। इस दौरान इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई है। दोनों परियोजनाओं से सात लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई हो सकेगी।
बता दें कि मुख्यमंत्री साय ने इंटरनेट मीडिया एक्स (X) पर एक पोस्ट डालकर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री को जानकारी दी है कि बस्तर संभाग लंबे समय से माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है, जिससे सिंचाई साधनों के विकास में पिछड़ गया है। यहां कुल बोये गए क्षेत्र 8.15 लाख हेक्टेयर में से केवल 1.36 लाख हेक्टेयर में ही सिंचाई सुविधाएं विकसित हो पाई हैं। बस्तर शांति और विकास की ओर द्रुत गति से बढ़ रहा है। ऐसे में दोनों परियोजनाएं पूरे बस्तर में कृषि विकास और रोजगार को बढ़ाने में मदद करेंगी। प्रधानमंत्री ने इसे गंभीरता से सुना और विचार करने की बात कही है।
परियोजना के महत्वपूर्ण तथ्य
दोनों परियोजनाओं की कुल लागत 49,000 करोड़ है।
बोधघाट सिंचाई परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के 269 गांव लाभान्वित होंगे।
इससे खरीफ और रबी सीजन में 3,78,475 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

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