नई दिल्ली: इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर शनिवार देर रात हुई एक घटना ने हवाई सफर की चकाचौंध के पीछे छिपी गंभीर व्यवस्थागत खामियों को उजागर कर दिया. तेज बारिश और हवा के दौरान टर्मिनल – 1 की छतरी (कैनोपी) का ऊपरी हिस्सा फट गया और जमा पानी अचानक नीचे गिरने लगा. गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इस घटना के साथ सवालों का सैलाब जरूर आ गया.
दरअसल, यह घटना महज एक प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं लगती है, बल्कि यह एक संकेत है कि बुनियादी ढांचे में कुछ ऐसा है जो हर बार चरम मौसम के सामने टिक नहीं पाता है. टर्मिनल-1 को हाल ही में अपग्रेड किया गया था और इसे भविष्य के यात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए तैयार किया गया था. फिर भी एक तेज बारिश व हवा का झोंका व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी साबित हुआ.
क्या सिर्फ मौसम ही जिम्मेदार है: दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने तेज हवाओं (70-80 किमी प्रति घंटा) व 80 मिलीमीटर बारिश को हादसे की वजह बताया है. लेकिन विशेषज्ञों व यात्रियों का सवाल ये है कि क्या कोई आधुनिक संरचना इतनी आसानी से चरम मौसम से चरमरा सकती है? खासकर तब, जब उसे इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया हो.
पुरानी गलतियों से सबक क्यों नहीं लिया: दिलचस्प बात ये है कि यह कोई पहली घटना नहीं है. जून 2023 में भी टर्मिनल-1 पर इसी तरह का हादसा हुआ था. तब भी बारिश व तेज हवा को जिम्मेदार ठहराया गया था, लेकिन तब न तो कोई गहन जांच हुई और न ही संरचनात्मक सुधार की खबर सामने आई. अब दो साल बाद वही कहानी दोहराई जा रही है.
गहराता भरोसे का संकट: यह घटना यात्रियों व आम लोगों के बीच गहरी चिंता और अविश्वास को जन्म दे रही है. सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे की बुनियादी संरचना वाकई सुरक्षित है. क्या हर मानसून में यात्रियों को इस तरह की घटनाओं का डर सताएगा.
समाधान या सिर्फ तात्कालिक मरम्मत: DIAL ने तुरंत मरम्मत शुरू कर दी, लेकिन असली मुद्दा यह है कि क्या भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए कोई ठोस व स्थायी कदम उठाए जाएंगे? सिर्फ छतरी का कपड़ा बदलना काफी नहीं समय आ गया है. पूरी डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता व जल निकासी व्यवस्था की निष्पक्ष और तकनीकी समीक्षा की जाए.

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