नक्षत्र का अपने खगोलीय शास्त्र में विशेष महत्व है, क्योंकि नक्षत्र का अर्थ ही है ‘जिसका कभी नाश न हो’. वहीं जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसमें नक्षत्र अपना विशेष महत्व रखता है. नक्षत्र देखकर ही जातक के कर्म भाव और लग्न भाव और उसके भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है.
वहीं जानकारी देते हुए पूर्णिया के आचार्य बंशीधर झा कहते हैं कि ज्योतिष शास्त्र और खगोल शास्त्र के मुताबिक इंसानी जीवन पर नक्षत्र का बहुत प्रभाव पड़ता है. उन्होंने कहा कि रेवती नक्षत्र का पहला, दूसरा और तीसरा चरण के जातक और अश्विनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक निश्चित तौर पर बड़े राजनीतिक गुरु, बड़े अधिकारी, सर्व सुख संपन्न और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला जातक होता है.
उन्होंने कहा गुरु मतलब होता है जो उपदेश देता है जिसमें कि अपने अंदर ज्यादा काबिलियत हो वहीं किसी को कुछ बता सकता है कुछ दे सकता है. मतलब जिसके पास कुछ देने योग्य वस्तु रहेगी. गुरु जिसे बृहस्पति भी कहते हैं. हालांकि, गुरु और भी पावरफुल तब रहेगा जब बृहस्पति का मीन राशि में प्रवेश होता है तब और भी पावरफुल और शुभ फलदायक रहता है. साथ ही उन्होंने कहा कि जब मीन राशि का अंत समय वह रेवती नक्षत्र है. ऐसे में रेवती नक्षत्र में जिस बच्चे का जन्म होता है खासकर वह अच्छे पद प्राप्ति करने में सफल होते हैं और वह आगे चलकर बड़े राजनीतिक गुरु और अधिकारी बनते.
हालांकि उन्होंने कहा वही अश्विनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे भी सफल होते हैं. उसके दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में जन्म लेने वाले बच्चे काफी आगे बढ़ते हैं. क्योंकि उसका अश्विनी नक्षत्र में जो बच्चे जन्म लेते हैं वह मेष राशि के अंतर्गत आते हैं. मेष राशि का स्वामी मंगल होता है. मंगल को सेनापति ग्रह कहा जाता है. जिस कारण अश्विनी नक्षत्र में जो बच्चे जन्म लेते हैं वह भी आगे बढ़ कर पद प्रतिष्ठा प्राप्ति करने में सफल होते हैं.
रेवती और अश्विनी नक्षत्र का इस चरण
वहीं उन्होंने कहा की रेवती नक्षत्र का पहला, दूसरा और तीसरा चरण के जातक और अश्विनी नक्षत्र के दूसरा ,तीसरा और चौथा चरण में जन्म लेने वाला जातक निश्चित तौर पर बड़े राजनीतिक गुरु और बड़े अधिकारी एवं सर्व सुख संपन्न और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला जातक होता है.ऐसे जातक का स्वभाव भी सरल होता है अपने स्वाभिमान पर जीते हैं.

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