रायपुर : जशपुर जिले के ग्राम पंचायत चेड़िया निवासी सरिता बाई नगेशिया ने दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और शासन की योजनाओं के सहयोग से आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। कभी दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली सरिता बाई आज सफल महिला उद्यमी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चेड़िया की रहने वाली सरिता बाई का जीवन प्रारंभ में अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों से भरा था। सीमित संसाधनों और अस्थायी आय के भरोसे कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाली सरिता बाई के लिए अपने बच्चों की शिक्षा का प्रबंध भी कठिन था। उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन तब आया जब उन्होंने ‘‘सीताराम महिला स्व-सहायता समूह’’ से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह की सदस्यता ने उन्हें न केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई, बल्कि आत्मविश्वास से परिपूर्ण कर स्वावलंबन की ओर अग्रसर किया। सरिता बाई ने समुदाय निवेश निधि (सीआईएफ) से ऋण लेकर मिट्टी की ईंट निर्माण गतिविधि प्रारंभ की। प्रारंभिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने साहस नहीं खोया और अपने कार्य को निरंतरता प्रदान की।
व्यवसाय की वृद्धि के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिससे उनके ईंट निर्माण कार्य को गति मिली। विगत तीन वर्षों से वे सतत रूप से इस कार्य में संलग्न हैं और वर्तमान में प्रतिवर्ष दो लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। आज उन्होंने अपने परिश्रम से प्राप्त आय से न केवल स्वयं के लिए स्कूटी खरीदी है, बल्कि अपने पति के लिए बाइक भी खरीद कर दी है। वर्तमान में वे कृषि कार्य में भी संलग्न हैं, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
सरिता बाई का कहना है कि पहले मैं दिन-भर मजदूरी करती थी, लेकिन अब मैं अपनी मेहनत से खुद का व्यवसाय चला रही हूँ। महिला समूह से जुड़ने के बाद मेरी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और अपने फैसले स्वयं ले सकती हूँ। यह बदलाव मेरे लिए किसी सपने के पूरे होने जैसा है। सरिता बाई नगेशिया की यह सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्वरूप है कि यदि इच्छाशक्ति हो और सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लिया जाए, तो आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।

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