नई दिल्ली। नवजातबच्चों की देखभाल करते समय खास सावधानी की जरूरत होती है। छोटी-सी लापरवाही या फिर कोई पुराना घरेलू नुस्खा बिना जांचे-परखे अपनाना कई बार बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जब 55 दिन का एक शिशु बार-बार पॉटी कर रहा था। घरवाले घबरा गए, कई टेस्ट करवाए,लेकिन कारण समझ नहीं आ रहा था। आखिरकार डॉक्टर की पूछताछ में, जो वजह सामने आई, वो हैरान करने वाली थी।
दरअसल यह सब कुछ पैरेंट्स की एक आम लेकिन गंभीर गलती की वजह से हो रहा था। आइए जानते हैं, आखिर माता-पिता की ऐसा क्या गलती थी, जिसकी वजह से बच्चे की तबीयत इतनी बिगड़ गई। साथ ही पूरा मामला क्या है आइए बच्चे का इलाज करने वाली पीडियाट्रिशयन डॉक्टर माधवी भारद्धाज से समझते हैं।
55 दिन के बच्चे को हुआ डायरिया
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में डॉक्टर माधवी भारद्धाज बताती हैं कि हाल ही में उनके पास एक 55 दिन के बच्चे का केस आया। बच्चे को डायरिया था और वह बिल्कुल पानी जैसी पॉटी कर रहा था, जो किसी भी दवा से ठीक नहीं हो रही थी। मां ने बताया कि उन्होंने सारे टेस्ट करवा लिए हैं, कई दवाएं दी जा चुकी हैं, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था।
नॉनस्टॉप पॉटी होने की वजह चली पता
पीडियाट्रिशियन बताती हैं कि उन्होंने मां से सीधा सवाल किया कि ‘आपके दूध के अलावा क्या बच्चे को कुछ और भी दिया जा रहा है?’ इस पर मां ने जो जवाब दिया कि ‘ हां, रोज नहाने के बाद हम इसे थोड़ा सा शहद चटाते हैं, जिसमें थोड़ा जायफल मिला देते हैं।’
छोटे बच्चे दिन में 10 बार कर सकते हैं पॉटी
बच्चों की डॉक्टर महिला को समझाते हुए कहती हैं कि छोटे बच्चे दिन में कई बार पॉटी करते हैं। कुछ तो 10 बार तक भी। जैसे ही बच्चा मां का दूध पीता है, वैसे ही थोड़ी देर में वह पॉटी कर देता है। इसे मेडिकल भाषा में 'गैस्ट्रोकॉलिक रिफ्लेक्स' कहा जाता है। ये कोई बीमारी नहीं है और इसे लेकर घबराने या ट्रीटमेंट कराने की जरूरत नहीं होती।
मां का दूध अब्जाॅर्ब हो जाता है
डॉक्टर बताती हैं कि जब बच्चे करीब डेढ़ से दो महीने के हो जाते हैं, तो कई बार वे मां का दूध पीने के बाद भी पॉटी करना बंद कर देते हैं। लेकिन यह देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह इसलिए नहीं होता कि उन्हें एसिडिटी हो गई है या उनका पेट रुक गया है, बल्कि इसलिए कि मां का दूध अब्जाॅर्ब हो जाता है और पॉटी बनने का कुछ बचता ही नहीं।
मसालों से छोटे बच्चों को रखें दूर
डॉ. माधवी आगे बताती हैं कि जायफल, सुपारी और ऐसे कुछ मसाले बच्चों की नाजुक आंतों को तेजी से स्टिमैल्युट करते हैं। जब हम इन चीजों से बच्चे की गट को जबरदस्ती मूव कराने की कोशिश करते हैं, तो शरीर रीटेलिएट भी कर सकता है।
बच्चों को बिल्कुल न चटाएं शहद
डॉक्टर कहती हैं कि बच्चों की आंतें (गट) अपने समय के साथ धीरे-धीरे मैच्योर होती हैं। रही बात शहद की, तो एक साल से छोटे बच्चों को हनी नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से एक खतरनाक टॉक्सिन उनके शरीर में जा सकता है, जिससे पैरालिसिस तक हो सकता है।
बच्चा करता था पतली पॉटी
डॉ. माधवी बताती हैं कि वह महिला आगे कहती है कि ‘मैम, शुरुआत में बच्चा बहुत पतली-पतली पॉटी करता था, इसलिए हमने उसे शहद और जायफल देना शुरू किया था। लेकिन करीब सवा महीने बाद बच्चे ने मल त्यागना ही बंद कर दिया था।’
इसलिए पतली होती है बच्चे की पॉटी
डॉक्टर आगे यह भी समझाती हैं कि मां के दूध से होने वाली पॉटी अक्सर पतली ही होती है क्योंकि नवजात शिशु के मल त्याग का रास्ता बहुत नाजुक होता है। अगर स्टूल जरा भी हार्ड होगा, तो इससे बच्चे को दर्द हो सकता है और वह बहुत असहज महसूस कर सकता है।
पैरेंट्स सतर्क रहें
डॉक्टर चेतावनी देती हैं कि इस वजह से भविष्य में बच्चे को खराब पाचन, कब्ज या बार-बार डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए पैरेंट्स को चाहिए कि वे इस बात का ध्यान रखें।

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